Sunday, November 4, 2012


बन्धाय विषया सक्तम मुक्त्ये निर्विषयं मन:
मन एव मनुष्यानाम कारणाम बँध मोक्षयो:
विशोक सागर जी ने आज कहा कि मनुष्यों का मन एक ही बंधन और मोक्ष का कारण है. रूप, रस,गंध आदि विषयो में आसक्त मन मनुष्य के बंधन का कारण है और विषयों से रहित मन मोक्ष प्राप्ति का कारण है...
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