Wednesday, June 21, 2017
*जैन धर्म के सिदांतो के पालन से योग होता है-मुनि विशोक सागर* *अशोकनगर-गणाचार्य श्री विरागसागरजी महा मुनिराज के सुयोग्य शिष्य श्रमण 108 श्री विशोकसागर जी मुनिराज एवं 108 श्री विदेेह सागर जी मुनिराज दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र थुबोन जी से विहार कर बुधवार प्रातः नगर के पारसनाथ जिनालय जी पहुँचें।नवीन बस स्टैंड से ढोल -बाजों के साथ भव्य अगवानी करके मुनिसंघ का नगर प्रवेश कराया गया। कई जगह पाद प्रक्छालन किया गया।मुनिसंघ के स्वागत के लिए रंगोली सजाई गई थी। श्रद्धालुओं ने श्री फल भेंट कर मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।धर्मसभा में विशोक सागरजी महाराज ने आज विश्व योग दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म के मूल मंत्र णमोकार को श्वांस उपसश्वांस के साथ बोलने से योग की अनुलोम विलोम क्रिया होती है।हम अपने जीवन में पूर्ण रीति अनुसार धार्मिक क्रियायें करें तो हमें यह योग दिवस मनाने की आवश्यकता ही नही पड़ेंगी।जैन साधु सदैव योग धारण करतें है।आचार्य पूज्य पाद स्वामी ने मन,वचन एवं काया को स्वस्थ रखनें के उपायों के बारे में शास्त्रों में विस्तार से समझाया हैं।कार्यक्रम के प्रारम्भ में विमर्श जागृति मंच एवं पार्श्वनाथ मन्दिर ट्रस्ट कमेटी के सदस्यों ने गणाचार्य विराग सागर जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन किया एवं स्मृति भारत ने मंगलाचरण किया।*
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment