Wednesday, January 14, 2015

आज का विचार विशोक वाणी

परम पूज्य श्रमण 108 मुनि श्री विशोक सागर जी मुनिराज ससंघ  श्री दिगंबर जैन मंदिर गली नं.2 उदासी आश्रम महावीर पार्क के पास कैलास नगर  दिल्ली-31 विराजमान है ।
संपर्क सूत्र- 9582492542 , 98107338806 , 9250700550
         विशोक वाणी 14/01/2015
जैसे घी को प्राप्त कर अग्नि पुष्ट होती है परन्तु तृप्त नहीं होती!नदियो का जल स्वीकार करके सागर पुष्ट होता है पर तृप्त नहीं होता उसी प्रकार जगत की सभी वस्तुओ को ये मन प्राप्त कर भी ले तो पुष्ट अवश्य हो जायेगा पर तृप्त नहीं हो सकता है ।

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